क्या सपनों की भी कोई क़ीमत होती है?
अगर हाँ, तो क्या उन्हें खरीदा-बेचा जा सकता है?
VyanaVoice की सीरीज़ “ज़िंदगी की पहेलियाँ” के तीसरे एपिसोड में सुनिए
अमन की रहस्यमयी यात्रा सपनों के बाज़ार में, जहाँ सपने बिकते भी हैं और खरीदे भी।
लेकिन क्या सच में कोई हमारे सपनों की सही क़ीमत लगा सकता है?
या कुछ सपने ऐसे होते हैं जिन्हें कभी नहीं बेचना चाहिए?
🎧 सुनिए और सोचिए – क्या आपके सपने बिकाऊ हैं, या वे अनमोल हैं?
👉 अगले एपिसोड में: “खामोश गवाह पेड़”
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