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Description

पिता दशरथ और माँ कौशल्या के न चाहते हुए भी राम ने अनुज लक्ष्मण और गुरू विश्वामित्र के साथ अपनी विजय यात्रा का आरंभ किया। इस दौरान राम ने विश्वामित्र से अपनी मनोदशा की चर्चा भी की।