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Description

गुरु वशिष्ठ ने राम लक्ष्मण के साथ आगे की यात्रा पैदल ही शुरू कर दी। वे सरयू के तट पर विश्राम हेतु रुके। फिर उन्होंने राम को पूरे आर्यावर्त में फैले रावण के अत्याचार से परिचित कराया।राम ने भी धैर्यपूर्वक उनकी बातें सुनी और उनपर उचित प्रतिक्रिया दी। राम ने ये प्रण लिया कि वो रावण के अत्याचारों से समाज को मुक्ति दिलाएंगे।गुरु वशिष्ठ अब राम के प्रति आश्वस्त हो गए थे।