ताड़का का वध करने के पश्चात राम लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र के साथ सिद्धाश्रम पहुँचे। राम की शौर्य गाथा आश्रम तक पहुंच चुकी थी।अब सारे आश्रमवासियों में एक नया उत्साह और आत्मविश्वास का जन्म हो चुका था। सभी राक्षसों के विरुद्ध युद्ध1के लिए अब तत्पर हो गए थे।