राम ,लक्ष्मण के आने से सभी आश्रमवासियों में एक नए उत्साह का संचार हो गया था। सभी बड़ी व्यग्रता से राक्षसों का इंतज़ार कर रहे थे। सुबह गुरु विश्वामित्र ने यज्ञ आरम्भ किया। राम को सूचना मिली कि राक्षस अपने शिविर से निकल कर आश्रम की तरफ आ रहे थे।राम लक्ष्मण के साथ बाकी आश्रमवासी सतर्क हो गए।