राक्षसों ने आश्रम में घुस कर धावा बोल दिया। मारीच ने यज्ञ को अपवित्र करने के लिए मांस का एक टुकड़ा यज्ञ वेदी की और फेंका और राम पर झपट पड़ा।किन्तु राम ने तत्परता से अपने बाण द्वारा मांस के टुकड़े को यज्ञ में गिरने से रोक लिया और अगले ही पल शीतेषु नामक बाण द्वारा मारीच को घायल कर दिया।उधर सुबाहु भी राम पर झपटा ।राम ने अपने आग्नेय बाण के प्रयोग से सुबाहु को मार गिराया। तब तक लक्ष्मण ने बाकी की राक्षसी सेना को खदेड़ दिया था।आश्रमवासी पूरी बहादुरी के साथ राक्षसों को डूड तक खदेड़ने में सफल रहे।और इस तरह गुरु का यज्ञ सफल हो गया।