राम द्वारा सुबाहु वध के पश्चात आश्रम में खुशी की लहर दौड़ उठी।गुरु विश्वमित्र का यज्ञ निर्विघ्न रूप से सम्पन्न हो गया था।गहन के पुत्र देवप्रिय को बंदी बना कर ले आये थे। वे न्याय चाहते थे।गुरु ने न्याय का भार राम को सौंप दिया।राम ने गहन के परिवार के साथ अन्याय की सज़ा देवप्रिय को मृत्यु दंड के रूप में दी।