देवप्रिय को निषादों द्वारा बंदी बनाने का समाचार उसके पिता सेनानायक बहुलाशव को मिल चुका था।वो अपनी सेना के साथ सिद्धाश्रम आया और राम से देवप्रिय को छोड़ने की मांग की। पर राम ने गहन के परिवार पर होने वाले अत्याचार की बात कही और देवप्रिय को मृत्युदंड की बात कही तो बहुलाशव ने क्रोध से अपनी खड्ग निकाल ली। और राम ने बहुलाशव को अपने तीर से बेध डाला।