राक्षस शिविर में अब कोई राक्षस नही था ,पर विश्वामित्र की यात्रा रुक नही सकती थी।उन्हें अब सिद्धाश्रम से आगे की यात्रा करनी ही थी।उन्हें उन अपह्रत युवतियों की चिंता थी कि अब उनका क्या होगा।उन्हें कोई समाज स्वीकार नही करेगा।तो राम ने ये सुझाव दिया कि क्यूं न गगन को इन युवतियों का अभिभावक नियुक्त कर दिया जाए।गुरु अब चिंतामुक्त हो गए थे।