विश्वामित्र राम और लक्ष्मण के साथ सिद्धाश्रम छोड़ चुके थे। उन्होंने रास्ते में ऋषि गौतम और अहिल्या की कथा आरम्भ की। गौतम ऋषि के आश्रम में सात दिवसीय सम्मेलन आयोजित हो रहा था।जिसमे मिथिला के राजा सीरध्वज आये थे।सीरध्वज ने ही देवराज इंद्र को भी आमंत्रित किया था। पूरा आश्रम इंद्र के स्वागत की तैयारी में लगा था।