गौतम ऋषि के आश्रम में देवराज इंद्र का आगमन हुआ। इंद्र को आश्रम में चल रही ज्ञान की गोष्ठियों में कोई रुचि नहीं थी। उसका सारा ध्यान ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या पर टिक गया था। उसने आश्रम की गरिमा को ताक पर रखते हुए अहिल्या के प्रति अपनी रुचि प्रदर्शित कर दी थी।