आश्रम में अधिवेशन ज़ोरों शोरों से चल रहा था।अमितलाभ इंद्र से अपमानित होकर राजा सीरध्वज के पास चला गया।उन्होंने भी उसकी मंशा जानकर उसे जाने का आदेश दे दिया था। इधर1अधिवेशन के दिन भर के कार्यो से फुरसत पाकर ऋषि गौतम अपने कुटीर में वापस आ गए थे। आज अहिल्या कुछ उदास थी।सहाय इंद्र वाली घटना से बहुत आहत थी पर उसने दिनभर बड़ी ही सजगता और समझदारी से अधिवेशन के सारे कार्य सम्पन्न किये थे।पुत्र शत को हल्का ज्वर भी था।