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Description

समस्त ऋषि समुदाय अहिल्या को दोषी मान चुका था। इस सुअवसर का लाभ उठाते हुए उपकुलपति अमितलाभ ने ऋषि समुदाय को एकत्रित किया और आश्रम के भ्रष्ट होने की बात कही और एक नया आश्रम बनाने का प्रस्ताव दिया। जिसके कुलपति या तो गौतम होंगे या वो स्वयं।गौतम तभी कुलपति रह पाएंगे जब वो अहिल्या का त्याग कर देंगे,जिसकी आशा अमितलाभ को कम ही थी और ऐसे में अमितलाभ के कुलपति बनने की संभावना निश्चित थी।