Listen

Description

अहिल्या स्वयं को पतित मान बैठी थी।उसे चिंता थी कि अब वह ऋषि गौतम की पत्नी और शत की माँ कहलाने के योग्य नहीं रही।उधर ऋषि गौतम भी इसी उहापोह में थे कि वो इंद्र से कैसे प्रतिशोध लें। क्योंकि इंद्र से प्रतिशोध लेने के लिए उन्हें ऋषि पद पर रहना जरूरी है और उनका ऋषि पद तभी बना रह सकता था जब वे अहिल्या का त्याग कर दें।जो उनके लिए बहुत कठिन था।