जनकपुरी से सदानीरा गौतम ऋषि के आश्रम आई। वो वास्तव में अपने पति आचार्य ज्ञानप्रिय का संदेश लाई थी। नया आश्रम तो बन गया था पर नए कुलपति की नियुक्ति नही हो पा रही थी क्योंकि राजा सीरध्वज गौतम के अलावा अन्य किसी को भी कुलपति के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रहे थे।पर गौतम ने मना करते हुए कहा कि वो अहिल्या को छोड़कर नही का सकते थे।