Listen

Description

गौतम नए आश्रम के कुलपति बन गए।लेकिन वो अहिल्या को छोड़ कर आने से दुखी भी थे। यज्ञ के उपरांत ही गौतम ने इंद्र को श्राप दे दिया कि अब इंद्र पूज्यनीय नही होंगे। राजा सीरध्वज ने उनके इस श्राप को कार्यान्वित करने का आश्वासन भी दिया। राम और लक्ष्मण दोनों ही अहल्या के एकाकी जीवन जीने से बहुत आहत थे।