राम द्वारा अहिल्या में जीवन फूंकने के बाद गुरु विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को लेकर जनकपुरी पहुँचे।राज्य सीमा के पास ही गुरु ने शिविर लगवाया।राम को जिज्ञासा थी कि आखिर गुरु उन्हें जनकपुरी क्यों लाये हैं तब गुरु ने राम को सीरध्वज की पुत्री सीता के विषय में बताया, कि किस तरह राम और सीता का विवाह अयोध्या और जनकपुरी दोनों राज्यों के साथ साथ पूरे आर्यावर्त के लिए श्रेयस्कर होगा।