राम सीता विवाह के पश्चात बारात अयोध्या की तरफ़ चल पड़ी।तभी वहां परशुराम का आगमन हुआ।वह शिव धनुष तोड़े जाने पर बहुत क्रोधित थे। लक्ष्मण ने उन्हें ललकारा तो वे क्रोधित होकर उन्हें मारने के लिए उधृत हो गए। फिर राम ने उन्हें शांत किया। परशुराम ने वैष्णवी धनुष के परिचालन की शर्त रखी । राम ने बड़ी ही सहजता से उसे भी खंडित कर दिया।परशुराम आश्वस्त होकर वापस लौट गए।और बारात फिर से अयोध्या की तरफ चल पड़ी।