राम वन जाने को उद्दत हो गए पर अभी ये समाचार सभी प्रियजनों को सुनाना बाकी था।राम के लिए ये और भी कठिन परीक्षा की घड़ी थी।उन्होंने सबसे पहले राज्याभिषेक की तैयारियों में जुटीं माता कौशल्या को ये समाचार सुनाया। राम के चौदह वर्षों के लिए वनवास का समाचार सुनकर वो पछाड़ खाकर गिर पड़ी।माता सुमित्रा ने राम को रोकने का बहुत प्रयास किया पर राम कस निर्णय अटल था।