राम ने सीता को वनवास जाने का समाचार दिया।सीता ने बहुत ही सहजता से राम का निर्णय स्वीकार कर लिया और स्वयं भी साथ वन जाने को तैयार हो गई।राम ने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि वो अयोध्या में रहकर भी अपना पत्नी धर्म निभा सकती हैं पर सीता नही मानी, वो हर परिस्थिति में राम के साथ रहना चाहती थीं।अंततः राम को सीता के हठ के आगे झुकना पड़ा।