राम,अयोध्या से विदा लेकर सीता और लक्ष्मण के साथ सरयू नदी के तट पर स्थित त्रिजट के आश्रम में पहुँचे। वहां पहुँचते ही आर्य सुमंत्र अयोध्या से राजा दशरथ का संदेश लेकर आये।वे एक रथ और सीता के लिए कुछ वस्त्राभूषण लाये थे। पर राम और सीता दोनों ने उसे स्वीकार करने से मना कर दिया। पर मंत्री चित्ररथ के समझाने पर सीता ने शवसुर दशरथ द्वारा भेजी गई भेंट स्वीकार कर ली।