राक्षसों को कुंभकार के गांव से भागने का समाचार मिल गया था।अब वो राम के आश्रम पर चढ़ाई की योजना बना रहे थे। इधर राम ने भी अपनी पूरी तैयारी कर ली थी। उन्होंने लक्ष्मण और उदघोष को रात में पहरे के लिए नियुक्त किया था।वे दोनों ही कवच धारण कर के अपने धनुष बाण लेकर पेड़ पर पहरा देने लगे।