राक्षसों ने रात में मौका पाकर राम के आश्रम के द्वार पर आग लगा दी पर राम अपने साथियों के साथ सचेत थे।सभी ने मिलकर राक्षसों पर तीर बरसाने शुरू कर दिए। तुंभरण को बंदी बना लिया गया।वो राम के सामने डर से घिघियाने लगा।राम ने तुंभरण को उदघोष के साथ द्वंद युद्ध करने के लिए ललकारा। पर तुंभरण उदघोष का साहस देखकर डर गया। राम ने उदघोष से तुंभरण को आश्रम की सीमा से खदेड़ने का आदेश दिया।