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Description

तुंभरण को बन्दी बनाकर उसे सीमा से बाहर कर दिया गया। राक्षसों का बुरा हाल देखकर गांव वालों में हिम्मत आ गई। वो सब झींगुर और सुमेधा के साथ राम के आश्रम में पहुंचे।राम को धन्यवाद दिया और आगे का मोर्चा स्वयं संभालने को तैयार हो गए।