इस पूरे घटनाक्रम से मुखर के अंदर दबी राक्षसों से बदले की भावना जाग उठी।लेकिन राम ने उसे उचित समय आने चोट करने की सलाह दी। उधर सीता और सुमेधा धीरे धीरे सामान्य जीवन की ओर अग्रसर हो गए थे।
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