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Description

विराध का अंत करके राम लक्ष्मण सीता और मुखर सुतीक्ष्ण मुनि के आश्रम को जाने लगे तभी रास्ते में उनका परिचय मुनि धर्मभृत्य से हुआ। किस्से उन्हें उस स्थान की पूरी जानकारी मिली।