ओजस गुनगुनी धूप में बैठे अख़बार पढ़ रहे थे। पास ही बैठी उनकी पत्नी मटर छील रही थीं। ओजस का परिवार आधुनिक समाज में उदाहरण के तौर पर देखा जा सकता है जहाँ तीन-तीन पीढ़ियाँ बड़े प्रेम व सौहार्द से रह रही थीं। परिवार टूटते ही क्यों है? आज तक न ओजस को इस प्रश्न का उत्तर मिला न ही हम सबको। परिवार के टूटने व जुड़े रहने की गुत्थी को सुलझाने में कितने ही समाज शास्त्रियों ने कितना समय लगा दिया पर आज तक इस गुत्थी को न वे सुलझा पाएए न ये ओजस जी के वश की बात है। हम कहीं इस विषय में और न उलझ जाएँ अतः चलिए उस सुहानी धूप में जहाँ ओजस अपने परिवार के साथ सीनियर सिटिज़न का आनन्द उठा रहे थे। Email-shradha.pdy@gmail.com