Listen

Description

25 वर्ष बाद जब मुझे अपने गाँव जाने का अवसर मिला तो मैं यह सोच कर उत्साहित थी कि मुझे पहले जैसे गाँव मिलेगा लेकिन वहाँ जाकर पता चला कि गाँव की मासूमियत को तो शहरों की हवा ने पहले ही निगल लिया। मेरी यह कहानी 2 वर्ष पूर्व सखी पत्रिका में छप चुकी है ।