जीवन के कड़वे सत्य को उजागर करती हुई यह एक ऐसी कहानी है जो काल्पनिक होते हुए भी बहुत अधिक सत्यता के धरातल पर रची गई है। द्रौपदी सिर्फ महाभारत में ही नहीं लुटी गई बल्कि कलयुग में तो कई बार लुटी और लुटती चली जा रही है। अगर मेरी कहानी आपको अच्छी लगी हो तो इसे अपने मित्रों के साथ साझा कीजिए तथा shradha.pdy@gmail.com पर अपनी प्रतिक्रिया देने की कृपा कीजिए।