स्कूल में जब बच्चे छोटे होते हैं तब उनके लिए जाति-पाति, ऊँच-नीच में कोई भेद-भाव नहीं होता। फिर अचानक क्या हो जाता है कि सारी चीज़े जाति-पाति, ऊँच-नीच पर आकर ठहर जाती हैं? एक सच्ची कहानी ----
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