महानगरीयजीवन तथा वैश्वीकरण ने हमें अपनों से दूर एकाकी जीवन जीने के लिए मजबूर कर दिया है। संभावनाओं का तलाशती मेरी यह कहानी'दादा जी की पाठशाला' जरूर सुनिए एर अच्छी लगे तो अपने मित्रों के साथ साँझा जरूर कीजिए तथा अपने विचार shradha.pdy@gmail.com पर भेजने का प्रयास कीजिए---