सत्या की व्यथा व लाचारी ने उसे चुप रहने पर मजबूर कर दिया है या उसके पिता की बीमारी या फिर हवेली की मालकिन चाची ने, जो सब कुछ जान कर भी अनजान थीं, या चाचा जो दाँव पर दाँव खेल रहा था या फिर उसकी अपनी माँ ---- जो सब कुछ जानती तो थी लेकिन उसे सामाजिक व्यवस्था व गरीबी ने आवाज उठाने की हिम्मत नहीं थी। यदि मेरी कहानी आपके दिल को छूने में सफल हुई तो अपने विचार Shradha.pdy @Gmail.com पर मुझ तक पहुंचाइए।
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