बिलकुल नहीं बिलकुल नहीं दोनों बहुओं के साथ-साथ साची की बेटियों ने एक साथ कहा। अरे भई हमारे पापा मम्मी लोगों के लिए मिसाल है इसलिए कुछ कमाल और धमाल तो होना ही चाहिए। शादी पूरे धूम.धाम से होगी। शायद इसी शोर-शराबे और जश्न ने उन दोनों को लोगों का दुश्मन बना दिया। हर गली, हर चौराहे पर नए दम्पति की चर्चा हो रही थी। इसी चर्चा ने सुनसान बालकनियों को गुलजा़र कर दिया।
"गुलजा़र बालकनियाँ " है तो कहानी पर सच्ची। मैं इसकी सत्यता का दावा भी कर सकती हूँ। आज के समय में जब बच्चे दूर रहते हैं तब बुढ़ापे में एकाकीपन एक अभिशाप है अतः मुझे यह विवाह उचित लगा वैसे आप अपने तरीके से सोच सकते हैं।
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