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Description

Durga 32 Naam Mala Stotra दुर्गा द्वात्रिंशनाम माला स्तोत्र ★
ॐ दुर्गा दुर्गार्ति शमनी दुर्गापद्विनिवारिणी ।
दुर्गमच्छेदिनी दुर्ग साधिनी दुर्गनाशिनी ॥

दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा ।
दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला ||

दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी ।
दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता ॥

दुर्गम ज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यान भासिनी |
दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थ स्वरूपिणी ॥

दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी ।
दुर्गमाङ्गी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी ॥

दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्गदारिणी ।
नामावलिमीमां यस्तु दुर्गाया मम मानवः ||

पठेत सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः

॥ श्री दुर्गार्पणं अस्तु ॥ "जो मनुष्य मुझ दुर्गा की इस नाममाला का पाठ करता है, वह निसन्देह सब प्रकार के भय से मुक्त हो जाएगा" - यह देवी का वचन है।
यह स्तोत्र शत्रु से मुक्ति पाने का शक्तिशाली स्तोत्र है । धन व्यापार में हानि , कर्ज़ में डूबा, अपनी बुरे व्यसनों से छुटकारा पाने के लिये, अथवा रोग से मुक्ति पाने के लिए, राहु के कुप्रभाव से बाहर आने के लिए यह स्तोत्र अत्यंत लाभदायी है । यह स्तोत्र स्वयंसिद्ध है । इसे सिद्ध करने की, स्थान शुद्धि की आवश्यकता नही है । नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए भी इस स्तोत्र से लाभ प्राप्त किया जा सकता है ।