हरि हरि बोल🙏🙏इस विडियो में निखिल जी नितिन जी ने श्रीमद् भागवतम् सकंद 5 के अध्याय 11 के श्लोक 4,5,6,7 द्वारा हमें मन के स्वभाव के बारे में बताया कि मन सतोगुण,रजोगुण और तमोगुण से दूषित होने के कारण अनियंत्रित हाथी की तरह भटकता है|,🌺11इंद्रियां और 5 तत्वों में मन सबसे उपर है और मन ही जीव की आत्मा को गुणों के हिसाब से अलग अलग योनियों में डालता है,सात्विक गुणों वाला व्यक्ति देवताओं की योनि में आता है,रजोगुण वाला मनुष्य योनि में जन्म लेता है और तमोगुणी व्यक्ति पशु पक्षी की योनि में जन्म लेता है|🌺तो हमारा मन ही बंधन का कारण है,मन को वश में करना मुश्किल तो है पर नामुमकिन नहीं,प्रभु के साथ जुड़कर अलग2 एक्टिविटी द्वारा मन को हरिनाम में लगाए रखना है और निरंतर प्रयास करते रहना है,माला जप नही छोड़ना चाहे कितने भी गलत विचार मन में आएं_जपते रहें.... हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे 🙏🙏 श्रीमद् भागवतम् महापुराण की जय🙏🙏
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