हरि हरि बोल🙏🙏इस में प्रीति जी ने स्कंद माता की कथा शेयर की है और निखिल जी ने श्रीमद् भागवतम स्कंद 5अध्याय 11.12,11.15,11.16 और 17 के श्लोकों द्वारा मन के स्वभाव के बारे में समझाया 🌷यह मन बड़ा ही चंचल है,जन्मों से मन हमें भटका रहा है,सही गलत का हम नही सोच पाते और मन के बहकावे में आ जाते हैं🌷जागृत और स्वप्र अवस्था में अलग अलग विचार मन में चलते रहते हैं,हम इन विचारों को रोक नहीं पाते क्योंकि यह मन का स्वभाव है,इन्हे कंट्रोल करना मुश्किल लगता है🌷पर जब हम मन को हरि नाम में लगाते हैं,निरंतर सत्संग,साधना,सेवा करने का अभ्यास करते हैं तो मन में चल रहे विचारों पर काबू पा सकते हैं🌷तो हमे गुरु की शरण ग्रहण करनी है और डिवोटी का संग करना है,प्रभु की कथा कहानियां सुननी और शेयर करनी है,जब बुद्धि में परमात्मा आयेंगे तो धीरे धीरे मन पॉजिटिव होने लगेगा👍तो हमेशा जपते रहें_हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे 🙏🙏
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