इंसान बनो कहना आसान है परंतु ये हमे सार्थक तभी बनने देता है जब हम वाकई अपने आस पास की गतिविधि से कुछ ना कुछ learn करें उसे अपने लाईफ implement करे क्युंकि जीवन तो ईश्वर की बनाई एक गाडी भर है जिसमे संस्कार रुपी engin and break का use किये बिना सब uncontrolled ही है