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Savitribai Phule:जब लड़कियो के लिए पाप थी पढ़ाई तब भारत की प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई ने उठाई थी आवाज। आमतौर पर हम अपने पुरखों यानी मर्दों के काम और समाजी योगदान के बारे में ख़ूब जानते हैं. चाहे घर हो या समाज या फिर देश… सदियों से मर्दों के किए गए को ही असली काम और योगदान माना गया.
भले ही आज लड़कियों की शिक्षा को अहमियत दी जाती हो लेकिन एक समय ऐसा भी था जब लड़कियों का पढ़ना अच्छा नहीं माना जाता था। अगर लड़कियां ऐसा सोचती भी थी तो उनकी आवाज वहीं दबा दी जाती थी। ऐसे समय में लड़कियों के लिए उम्मीद की किरण बनकर आई थी भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले। सावित्री बाई फुले भारतीय इतिहास का ऐसा नाम है, जिन्होंने लड़कियों की पढ़ाई के लिए पत्थर तक खाए लेकिन पीछे नहीं हटी। अंग्रजों का शासन होने के कारण लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज उठाना सावित्री बाई के लिए ओर भी मुश्किल रहा लेकिन उन्होंने लड़को-लड़कियों के बीच खींची भोदभाव की लाइन को मिटाने का जिम्मा उठा लिया था।