32
अथ द्वितियोSध्याय:।; भक्तिका दु:ख दूर करने के लिये पहले नारदजी भक्तिको श्री कृष्णचरणका स्मरण करने कहतें हैं। भक्तिकी महिमा उसको बतातें हैं। भक्ति पुष्ट हो जाती है।फिर भक्ति प्रार्थना करनेे से तो ज्ञान वैराग्य के कानमें वेदघोष करतें हैं,वेदान्त घोष करतें हैं, गीतापाठ करतें हैं, पर वो जम्हाई लेकर फिर सो जातें हैं। फिर वो भगवानका स्मरण करतें हैं। स्मरणकी महिमा ....दिलकीपूकार...और पूकारनेसे आकाशवाणी होती है।सत्कर्म करने कहा।वो कैसे करना उसके बारे में संतशिरोमणि महानुभाव बतायेंगे। कोई भी मार्ग नहीं बतातें हैं। फिर सनत्कुमार बतातेहें कि ज्ञान -वैराग्य भक्ति जगानेके पहलेसे ही उपाय है। नारदजीको दत्तचित्त होकर,,समाहित चित्त - प्रसन्न चित्त हो कर सुनने कहतें हैं।