कोवोरिच(Covorich) :
ये शब्द हमने ईजाद किया है कल यूँ ही बातों-बातों में उस नई अमीर नस्ल के लिए, जो इस बीमारी में अमीर होंगे। वो लोग जो महंगे दाम में आज दवाईयां बेच कर कल आपको फ्री- मार्किट के फायदे गिनाएँगे।
आज अस्पताल में एक एक बेड की नीलामी करते लोग, कल एक लंबी गाड़ी में बैठ ये बताएंगे कि गरीब वही लोग होते हैं जिन्होंने कभी अमीर होने की कोशिश नहीं की।
मुल्क को इस नए अमीर व्यक्ति के लिए तैयार रहना होगा। वो जो हमारे ध्वस्त होते सिस्टम की ईंटे बेच कर अपना महल तैयार करेगा। वो चैन की नींद सोयेगा, उसकी कहानियां चाव से सुनी जाएंगी कि कैसे उसने जरूरी समान जमा करके ऊंचे दाम पर बेचे। एक दो वेब-सीरीज भी उसकी बहादुरी पर निकाल दे जाएंगी।
फिर बुढ़ापे में वो अपने खून लगे पैसों से कुछ परोपकार करेगा। और देश उसका सदैव आभारी रहेगा।।
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