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Description

य लिंग आधारित भेदभाव और पितृसत्तात्मक विचारधारा से उत्पन्न सामाजिक कुरीतियों का एक व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

 कन्या भ्रूण हत्यादहेज प्रथा और महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा जैसी गंभीर समस्याओं पर प्रकाश डाला गया है।

लेखक डॉ. सुभाष चंद्र स्पष्ट करते हैं कि स्त्रियों की वर्तमान स्थिति जैविक न होकर सामाजिक संरचना और रूढ़िवादी पालन-पोषण का परिणाम है।

समाज में लैंगिक समानता और महिलाओं के स्वतंत्र अस्तित्व के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास किया गया है।

विभिन्न सांख्यिकीय आंकड़ों और कविताओं के जरिए भारतीय समाज में महिलाओं के संघर्ष और गिरते लिंगानुपात की चिंताजनक तस्वीर पेश की गई है।

सामाजिक-लिंगभेद की उत्पत्ति और इसके पीछे निहित मुख्य पितृसत्तात्मक कारण क्या हैं?

भारतीय समाज में महिलाओं के मौलिक अधिकारों का हनन किन रूपों में होता है?

लैंगिक भेदभाव को समाप्त कर सामाजिक समानता स्थापित करने के प्रमुख उपाय क्या हैं?