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Description

खलील जिब्रान की लघुकथा पागलखाना व्यंग्य है सामाजिक संरचनाओं पर जो व्यक्तित्व को अपनी तरह से विकसित का मौका नहीं देती. सामाजिक हों या शैक्षिक समस्त संस्थाएं व संबंध व्यक्ति को अपने जैसा बनाना चाहती हैं।