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Description

 हिंदी साहित्यकार कुंवर नारायण की कविता दुनिया की चिंता एक विडंबना का व्यक्त करती है, कि बाहुबली व्यक्तियों के स्तर पर और देशों के स्तर पर जन हितैषी होने का दिखावा करते हैं, लेकिन असल में दुनिया को इन्हीं से चिंता है।

दुनिया की चिंता



छोटी सी दुनिया

बड़े-बड़े इलाके

हर इलाके के

बड़े-बड़े लड़ाके

हर लड़ाके की

बड़ी-बड़ी बंदूकें

हर बंदूक के बड़े-बड़े धड़ाके

सबको दुनिया की चिंता

सबसे दुनिया को चिंता।