वास्तविकता संग्रह | शुक्रवार, ९ जुलाई २०२१
अनुग्रह के द्वारा समृद्धि
पास्टर क्रिस
परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे संपत्ति प्राप्त करने की सामर्थ्य ..... देता है ...... (व्यवस्थाविवरण 8:18)|
समृद्धि का इस बात से कोई लेना - देना नहीं है कि आप कितना अधिक उपवास और प्रार्थना करते हैं; यह परमेश्वर का काम है| परमेश्वर है जो आपको समृद्ध करता है| उसे आपकी समृद्धि में आनंद आता है (भजन संहिता 35:27)| आपको आश्चर्य करने की जरूरत नहीं है कि परमेश्वर आपको समृद्ध करना चाहता है या नहीं| वह नही चाहता है कि आप अपना भरोसा क्रमित मानवीय हिसाब पर रखो, क्योंकि यह काम नहीं करेगा| हो सकता है कि वे थोड़े समय के लिए काम करते हुए दिखे, लेकिन वे बने नहीं रहेंगे| सच्ची और बनी रहने वाली समृद्धि अनुग्रह के द्वारा मिलती है|
मरकुस 10 में, संपत्ति के प्रति व्यवहार की एक जवान धनी शासक की कहानी बतायी गई है| वह जानता था कि अनंत जीवन का अधिकारी होने के लिए उसे अवश्य ही क्या करना चाहिए| यीशु ने उसे सारी आज्ञाओं का पालन करने के लिए कहा; लेकिन उसने कहा, "हे गुरु, इन सब को मैं लड़कपन से मानता आया हूँ|" बाइबल कहती है कि यीशु ने उसे प्रेम से देखा और उससे कहा, "जा, जो कुछ तेरा है उसे बेच कर कंगालो को दे, और आकर पीछे हो ले" (मरकुस 10:21)| इस बात से दुखी होकर धनी युवा शासक वहाँ से चला गया| वह अपनी संपत्ति से बंधा हुआ था, क्योंकि बाइबल कहती है कि उसके पास बहुत संपत्ति थी; या जैसा किसी ने इस बारे में सही कहा है: "उसकी बड़ी संपत्ति ने उसे जकड़ रखा था|"
फिर यीशु ने चारो ओर देखकर अपने चेलों से कहा, "..... धनवानों का परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है! " (मरकुस 10:23)| यीशु उन्हें समझा रहा था कि उद्धार उनके पैसे या बड़ी संपत्ति के द्वारा नहीं होगा बल्कि परमेश्वर के आत्मा के द्वारा होगा| यीशु चाहता था कि धनी युवा व्यक्ति अपना भरोसा उसकी संपत्ति में नहीं बल्कि परमेश्वर में रखे, जो संपत्ति का दाता है|
आपकी समृद्धि किसी व्यक्ति पर, आपके व्यवसाय पर, इस विश्व की व्यवस्था और सरकारों या अर्थ व्यवस्था पर निर्भर नहीं है बल्कि परमेश्वर पर निर्भर है| यह उसके अनुग्रह के द्वारा है| अब आप समझ सकते हैं कि 2 कुरिंथियो 9:8 में वह क्यों कहता है: "परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे; और हर एक भले काम के लिए तुम्हारे पास बहुत कुछ हो| संपत्ति प्राप्त करने की जो सामर्थ्य परमेश्वर अपने बच्चों को देता है, वह आत्मिक सामर्थ्य है, नाकि राजनैतिक सामर्थ्य या अर्थ शास्त्रीय सामर्थ्य| यह वह सामर्थ्य है जिसे वह परमेश्वर के सत्यनिष्ठा के कार्यो को फैलाने के लिए हर मसीही को देता है| परमेश्वर की स्तुति हो!
घोषणा: जीवन में मेरा उद्देश्य है पृथ्वी में और विश्व भर में मनुष्यों के हृदय में परमेश्वर की सत्यनिष्ठा को स्थापित करना| और इसे पूरा करने के लिए, जिस किसी वस्तु की जरूरत है, वह सब मेरे पास है| इसलिए, मैं परमेश्वर के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए कटिबद्ध हूँ, परमेश्वर की महिमा के लिए, अपने समय और स्रोतों के साथ उसके सत्यनिष्ठा के कार्य को बढ़ाते हुए| आमीन!
अतिरिक्त अध्ययन : 1 इतिहास 29:12; 2 कुरिंथियो 9:8 एएमपीसी; भजन संहिता 35:27 एएमपीसी
एक वर्षिय बाइबल अध्ययन योजना : प्रेरितों के काम 20:17-38; अय्यूब 22-24
दो वर्षिय बाइबल अध्ययन योजना : लूका 8:1-10; यहोशू 6