इन दोहों में (# ४६-५०) -गोस्वामी जी ने भगवान राम की एक दोहे मे स्तुति करते हुए आगामी दोहों में उनके प्रेम का अनुभव बताया है की कैसे भगवान हर स्थिति में भक्त का मान ही रखते है | In these two line poetry Tulsidasji does his prayer and describes how Shri Ram loves his devotees.
Key Words: प्रेम, श्री राम, भक्त