वक़्त से लड़ते हो,और शायद उम्र को कोसते हो।
सूने आकाश में क्या तकते हो,श्याद काफी गहरी सोच रखते हो।
खुद में खुद से उलझे रहते हो,शायद काफी मगरूर लगते हो।
माजी से रूबरू होना चाहते हो,शायद कोई गलती सुधारना चाहते हो।
मिलते हो फुर्सत में,और उमर भर की कसमें खिलाते हो।
पिता से प्यार तो करते हो,मगर इज़हार नही कर पाते।
तुमको तुम चाहिए, मगर तुमको तुम नही चाहिए,
शायद इस वक़्त तुमको कोई और चाहिए।