अकेला हु कोई साथ नही,
साथ वाले भी एक साथ नहीं।
एक उम्र पे मिलते है,एक उम्र पर बिछड़ते है,
क्या ये उम्र के दोतरफे सिलसिले साथ लिए चलते है?
साथ चलते है,मगर जब इनको मिलना नही तो बस
हिज़्र की ही बातें करते है।
कुछ अफ़सानों को इत्र की तरह यादों में घोलना नही,
अब हमारे साथ रहने का ख्याल भी दिल में रखना नही।
अबकी बार आना तो जाना नही,
जाना तो आना नही,
हम भी काफ़ी मगरूर है,
क्योंकि इस बार हमको साथ निभाना नही।