Listen

Description

...जब नाचने लगे थे मोर
कहा जाता है कि एक रोज अफगानिस्तान की शाह ने खुले बाग में संगीत की महफिल सजाई थी. गाने के लिए गुलाम अली साहब को दावत दी गई. गुलाम अली साहब ने ज्यों ही सुर लगाया, वहां चहलकदमी करते हुए मोर पंख फैलाकर नाचने लगे. बंदिश खत्म होते ही उसने अपने पंख समेट लिए. Sound mixing& editing: Jiya Vyas(@notreallyjiya) Image credits: Google Doodle Connect to us on instagram: @_thepodcastfactory