00:00 - 25 करोड़ का प्रश्न: लोग मजाक उड़ाते हैं, पर विश्वास ही समाधान है।
02:10 - सेठ भरादत्तमल और डॉक्टर की कहानी: शंका करने वाले को कभी सही इलाज नहीं मिलता।
08:30 - गणेश कुमार गर्ग (आगरा) का प्रसंग: गिरती श्रद्धा और बाबा जी का कड़ा जवाब।
14:00 - मौन की महिमा: "मन मस्त हुआ फिर क्यों बोले" - ग्रंथ पूरा होने के बाद भी प्रश्न क्यों?
17:00 - मन ही दुख का कारण है: शंकाएं और धैर्य की कमी ही जीवन में अशांति लाती है।
24:00 - समस्या का समाधान बनाम पागलपन का इलाज: डॉक्टर और मरीज का सटीक उदाहरण।
30:00 - बाबा जी के भीतर मोदी? एक मजेदार कमेंट और 25 करोड़ के वादे पर खुली चर्चा।
41:00 - जप (Jap) बनाम एकाग्रता (Concentration): जप से शक्तिहीनता आती है, एकाग्रता से पुंज बनता है।
48:25 - कबीर का क्रांतिकारी सूत्र: "भलो भयो हरि बिसरो, सर से टली बला" - नाम जपने के बोझ से मुक्ति।
56:40 - गागर का छलकना: संत ज्ञान बांटता नहीं, वह तो स्वतः ही पात्र से छलक जाता है।
58:40 - बाबा नानक की कहानी: चरे हुए खेत का स्वतः हरा-भरा हो जाना और पिता की शर्मिंदगी।
01:03:00 - संत गंगाराम और अंग्रेज अधिकारी: सूखे तालाब में पानी का चमत्कार और बाबा का हुस्नर त्यागना।
01:22:45 - गाय और कुत्ते की सेवा: प्राण त्यागते समय गाय, कुत्ते और संत का अद्भुत आत्मिक संबंध।
01:26:30 - गौ सेवा का संकल्प: अपने वजन के बराबर सवा-मनी कराने का सही विधान और महत्व।
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सारांश (Summary)
इस वीडियो में बाबाजी 25 करोड़ की योजना पर उठ रहे संशयों का उत्तर देते हैं। वे कहानियों के माध्यम से समझाते हैं कि शंकालु मन कभी सत्य और समाधान नहीं पा सकता। बाबाजी 'जप' के बजाय आत्म-साक्षात्कार और 'सहजता' पर जोर देते हैं। साथ ही, वे गुरु नानक और संत गंगाराम के प्रसंगों के जरिए गौ-सेवा और जीव-दया की महिमा बताते हैं।