लीला अपने दाँत के गिरने का इंतज़ार ही नहीं कर पा रही..जब दाँत फाइनली गिरने वाला था तो वो गिरकर हाथ में आने की बजाह गुम होगया ..
आइए सुनते हैं ये प्यारी की कहानी “लीला का ढुल मुल दाँत “
कहानी - ममता नैनी
चित्र - हबीब अली
अनुवाद - सुषमा रौशन